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जीवन मे चहुमुखी खुशिया और तरक्की के लिए लाये घर मे पारद पिरामिड

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पारद का प्रत्येक अक्षर एक-एक देवता का प्रतीक है। ‘पारद’ का शाब्दिक अर्थ है-प-विष्णु, अ-कालिका, र-शिव और द-ब्रह्मा। यदि पारद प्रतिमा को मंत्रात्मक क्रियाओं द्वारा चैतन्य करके पारद पिरामिड के रूप में भवन में स्थापित किया जाए तो वहां रहने वाला प्रत्येक सर्वत्र सुखशांति अनुभव करता है।

चमत्कारी पारद शिवलिंग

भगवान शंकर को पारा अत्यधिक प्रिय है तथा रसराज पारद भोले बाबा का शक्ति रूपी विग्रह होने के कारण ही समस्त सुरासुर तथा देवी-देवताओं के लिए अनुकरणीय एवं वंदनीय है। इस अद्भुत गुणों के कारण ही पारद शिवलिंग को मृत्युंजय तथा अमृतेश्वर भी कहा जाता है।

पारद शिवलिंग के दर्शन एवं पूजनादि करने से मनुष्य को अति आनंद की अनुभूति होती है एवं समस्त सांसारिक बाधाओं से भी मुक्ति मिल जाती है, अर्थात यह काया (दैहिक), वाणी (वाचिक) तथा मानसिक पापों को हरने वाला है। यह दैहिक, दैविक तथा भौतिक रोगों से रक्षा करता है। यह वात, पित्त तथा कफ जनित दोषों को भी दूर रखता है। यह सुख-शांति, समृद्धि , धन-संपत्ति, ऐश्वर्य, यश, कीर्ति, सफलता, विद्या, ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाला है। अतएव ऐसे महिमा युक्त, दिव्य तथा अदभुत अलौकिक गुण संपन्न तथा महिमामयी रसराज, रससिद्ध भगवान पारदेश्वर पारद शिवलिंग के नित्य दर्शन और पूजन सर्वश्रेष्ठ है। इससे जीवन आनंदमयी, निरोगी तथा धन-धान्य से भरपूर रहेगा और मनुष्य की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। दिव्य सर्लिन पारद शिवलिंग का नित्य पूजन और दर्शन करने से धर्मार्थ काम मोक्षाणाम् आरोग्यं प्रदायकं – अर्थात धर्म, काम, मोक्ष के साथ आरोग्यता की प्राप्ति सहेज में हो जाती है।

पारद शिवलिंग संसार में एक अद्वितीय, अलौकिक, अद्भुत , अकल्पनीय , अवर्णीय और अप्रत्याशित रूप से चमत्कारिक अत्यंत दुर्लभ दिव्य वस्तु है।

 

सुरक्षा हेतु पिरामिड लॉकेट का प्रयोग

शत्रुओं का नाश करने में भी पिरामिड उपयोगी सिद्ध होता है। घर को शत्रुओं से बचाने के लिए घर के चारों कोनों में मंगल दोष पिरामिड की स्थापना इस प्रकार करें की यह किसी को नजर न आए। साथ ही घर का प्रत्येक सदस्य अपने गले में सोने अथवा चांदी का पिरामिड लॉकेट भी धारण करें। इससे शत्रु आपका कोई नुकसान नहीं कर सकेगा।

सर्वरोगनाशक पिरामिड

विभिन्न रोगों से मुक्ति हेतु तथा, निरोगी बने रहने हेतु रोगनाशक पिरामिड को पानी से भरे ताम्बे के पात्र में रात भर को रख दें। प्रातः उठ कर वह पानी पिएँ। शीघ्र ही आप निरोगी हो जाएंगे।

यौवन को सदाबहार बनाए रखें

चिरयौवन बने रहने प्रायः सभी की आकांक्षा होती है। इस आकांक्षा की पूर्ति हेतु ताम्बे के पात्र में जल भरकर अभिमंत्रित पिरामिड के नीचे रखें तथा प्रतिदिन २-३ सप्ताह तक खाली पेट इसको पीए। धीरे-धीरे आपको फर्क महसूस हो जाएगा। नेत्र ज्योति बढ़ जाएगी और चेहते की झुर्रियां भी ख़त्म हो जाएंगी।

मूल्यवान रत्नों को प्रभावशाली बनाएं

अनेक प्रकार की परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए रत्नों का प्रयोग किया जाता है। ज्योतिष में अनेक रत्न होते हैं, जो की अपने विशेष प्रभाव के लिए जाने जाते हैं , लेकिन इनका प्रभाव भी एक सीमित समय तक ही रहता है। रत्नों को पुनःशक्तिवान तथा प्रभावशाली बनाने हेतु आप उस रत्न को (जिस आप प्रयोग में लेना चाहते हैं) मंत्रसिद्ध पिरामिड के शक्ति केंद्र के नीचे रखकर पुनः शक्तिदायक बना सकते हैं।

मिरगी के दौरों में राहत

मिरगी के दौरे में राहत पाने हेतु प्रत्येक माह पूर्णमासी में रात दस बजे सिर पर पिरामिड कैप पहनकर पद्मासन करें। प्रयोग से पूर्व वह टोपी अभिमंत्रित अवश्य करा लें। शीघ्र ही आप लाभ प्राप्त करेंगे।

मुकद्दमों में विजय प्राप्ति

अदालत में मुकद्दमों में विजय श्री प्राप्त करने हेतु, घर के पूजा स्थल पर सिद्धि विनायक पिरामिड स्थापित करके प्रत्येक बुधवार के दिन उसकी पूजा करें तथा गन गणपतये नमो नमः मंत्र का उच्चारण कर उसे अभिमंत्रित करें। जब भी अदालत जाएं पिरामिड को लाल कपडे में लपेटकर अपने साथ ले जाएं। आपको अपने सभी मुकद्दमों अथवा विवादों में विजयश्री प्राप्त होगी।

जीवन में उत्तरोत्तर प्रगति

सर्वतोभद्र पिरामिड जीवन में चहुं ओर विकास का प्रमुख उपाय है। यह पिरामिड ज्यादा लाभ उस स्थिति में देगा जब जातक प्रत्येक शुक्रवार प्रातः जल्दी उठकर तत्पश्चात शुद्ध ताजे जल और लाल पुष्पों से इसका पूजनादि करें। कुछ ही दिनों में वांछित परिणाम सामने आ जाएगा।

जीवन को वैभवशाली बनाएं

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु तथा ऐश्वर्यशाली तथा सुख वैभवशाली बनाने हेतु लक्ष्मी पिरामिड यन्त्र बहुपयोगी है। यह यंत्र सुख सौभाग्यदायक तथा समृद्धिदात्री माना गया है। यह पंचधातु से निर्मित, लक्ष्मी पिरामिड चारों और से घुमाकर रखा जा सकता है यह एक विशिष्ट उपयोगी पिरामिड यंत्र है। भवन या व्यवसाय स्थल पर इसकी स्थापना निरंतर आर्थिक उन्नति देती है। अतः इसे अपनी तिजोरी में रखना फलदायी रहता है। इसके प्रभाव से आपकी तिजोरी रिक्त कभी नही रहेगी।

उदरशूल से राहत

पेट दर्द से राहत पाने हेतु, दर्द वाले स्थान पर एक उचित आकार का अभिमंत्रित पिरामिड थोड़ी देर के लिए रखे। कुछ ही देर में बिना दवा के उदरशूल से राहत मिलेगी।

घरेलू परिस्थितियों में अनुकूलता

घर के दरवाजे की अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थिति की मकान मालिक के सौभाग्य या दुर्भाग्य के कारण बनती है। एक बार द्वार बनवाने के पश्चात उसे तोडना तो असंभव होता है किन्तु पिरामिड की सहायता से अपनी स्थिति में बदलाव अवश्य लाया जा सकता है। दरवाजे के बाहर तीन अभिमंत्रित पिरामिड लगाना श्रेयस्कर होता है। एक पिरामिड दरवाजे के ऊपर, एक दायी ओर तथा एक बायीं ओर लगाएं। यह अवश्य ध्यान रखें की दरवाजे के ऊपर वाला पिरामिड अन्य दो से ज्यादा बड़ा होना चाहिए। ऐसा करने से आपका दरवाजा यदि गलत दिशा में होगा तो भी वह दोष दूर हो जाएगा और घरेलू स्थिति में भी सुधार आ जाएगा।

माँ भगवती की कृपा प्राप्ति

माँ भगवती की सद्कृपा प्राप्त करने के लिए, आराधना करते समय दिव्यनुग्रह पिरामिड यंत्र रखें। प्रतिदिन श्रद्धा भाव से साधना करके माँ भगवती की सद्कृपा प्राप्त हो जाती है। यह यंत्र देवी की तस्वीर के पास ही रखें।

बिस्तर पर पेशाब की आदत छुडाएं

बच्चो को बिस्तर गीला करने की आदत होती है, जो की एक कठिन समस्या है। इससे निजात पाने हेतु एक पिरामिड चिप बच्चे के बिस्तर के उस कार्नर पर रखें जो पूर्व दिशा की ओर हो। आप धीरे-धीरे इस समस्या से निजात पाएंगे।

पथरी रोग से छुटकारा

पेट में होने वाले पथरी रोग के निवारण हेतु, रात्रि में एक लोटा पानी में ताम्बे का अभिमंत्रित पिरामिड डालकर रख दें। प्रातः उठकर शौचादि से निवृत हो लोटे से पिरामिड निकालकर खाली पेट पी जाएं। ऐसे नित्य प्रतिदिन करने से पथरी मूत्र द्वारा शीघ्र ही बाहर निकल जायेगी।

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