आयुर्वेद उपचार

याददाश्त बेहतर बनाने में मददगार है आयुर्वेद

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याददाश्त बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय हिंदी में  : (Ayurvedic Upay in Hindi)

भाग दौड़ वाली इस जिंदगी में जहां पूरे दिन इंसान कितने ही काम कर लेता है जिसके चलते कुछ काम उसे याद रहते हैं और कुछनहीं। जो काम याद नहीं होते वे ही सबसे ज्याद महत्वपूर्ण होते हैं। जैसे गाड़ी की चाबी कहीं पर भूलना, घर पर ताला लगाना, यापैसों के लेन देन में कुछ भूलना आदि है। इसके अलावा भी और कई महत्वपूर्ण काम होते है जिनके समय पर याद न आने परआपको भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। भक्तिसंस्कार आपके लिए लाया है आपकी स्मरण शक्ति को बढ़ानेके अति उपयोगी उपाय जो प्राचीन समय पर ध्यान योगी और देवता किया करते थे। इसलिए अब आपको परेशान होने कीजरूरत नहीं है बस ध्यान से इन वैदिक उपायों को पढ़ें।

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बार–बार भूलने की समस्या केवल बूढ़े लोगों के साथ ही नहीं बल्कि जवान लोगों के साथ भी होती है। दरअसल भूलने का मुख्यकारण एकाग्रता की कमी है। स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए दिमाग को सक्रिय रखना आवश्यक है। अगर आपके साथ भी यहीसमस्या है कमजोर स्मरण शक्ति आपके लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, तो नीचे लिखे घरेलू उपायों को जरुर अपनाएं।

स्मरण शक्ति को बढ़ाने के आसान तरीके: how to improve memory in hindi

1. गाय के घी से सिर पर कुछ दिनों तक मालिश करने से आपकी स्मर्ण शक्ति बढ़ती है।

2. यदि आप अखरोट खाते हैं तो भी आपकी याददाश बढ़ती है। 10 ग्राम किशमिश के साथ 20 ग्राम अखरोट खायें। इससेमानसिक तनाव भी दूर होता है।

3. गाजर का हलुआ खाते रहने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है।

4. सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाने से दिमागी विकार दूर होता है।

5. रात को 10 बादामों को पानी में भिगोकर सुबह उनका छिलका उतार लें और इसे 10 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकरकुछ दिनों तक खाने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है।

6. रात को उड़द की दाल को भिगोकर सुबह पीस लें और इसे दूध और मिश्री के साथ खायें। एैसा करने से दिमाग तेज होता है।

7. सौंफ को मोटा कूट कर उसे छान लें और इसे एक–एक चम्मच सुबह शाम दो बार पानी या दूध के साथ फंकी लें।

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8. जीरा, अदरक, और मिश्री को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर खाने से याददाशत की कमजोरी दूर होती है।

9. गुलकन्द को रोज दिन में दो से तीन बार खाने से स्मरण शक्ति को लाभ मिलता है।

10. शहद में 10 ग्राम दालचीनी को मिलाकर चाटने से दिमाग तेज होता है।

11. 6 से 7 काली मिर्च में 25 से 30 ग्राम मक्खन और शक्कर मिलाकर रोज खाने से दिमाक तेज होता है और भूलने की बीमारीदूर होती है।

12. गेहूं के पौधे का रस कुछ दिनों तक रोज पीने से भूलने की बीमारी दूर होती है।

इन प्राकृतिक उपायों को करने से आपका दिमाग तेज होगा साथ ही भूलने की बीमारी भी दूर होगी। इसके लिए सबसे ज्यादजरूरी है कि आप अपनी आदतों पर ध्यान दें। और साथ ही इन प्राकृतिक उपायों का सही मात्रा में उपयोग करें ताकि अपकीस्मर्ण शक्ति बढ़ सके।

उस समय बहुत गुस्सा आता है जब काफी मेहनत करने के बाद भी परिणाम अच्छे नहीं मिलते। घर हो या ऑफिस या फिरपढ़ाई के संदर्भ से, यदि हमारी तुलना में कोई अन्य व्यक्ति किसी विशेष कार्य को अच्छे से कर लेता है तो हमारा दिमाग घूमजाता है। उस समय समझ नहीं आता कि आखिरकार हम उसी क्षमता से कार्यों को पूरा क्यों नहीं कर पाए। लेकिन इसमें आपकीभी कोई गलती नहीं है.

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 तो क्या करें?

भगवान ने हर मनुष्य को एक विशेष क्षमता युक्त करके ही धरती पर भेजा है। कोई दिमाग से तेज है तो कोई अन्य कार्यों मेंफुर्तीला है। लेकिन आप स्वयं अपनी दिमागी क्षमता को बढ़ा सकते हैं, जानना चाहेंगे कैसे? केवल कुछ जड़ी–बूटियों के प्रयोग से.

प्राकृतिक जड़ीबूटियां : Top Ayurvedic Jadi Butiya

जी हां… वर्षों से ही प्राकृतिक जड़ी–बूटियों ने इंसान की भिन्न–भिन्न समस्याओं का हल निकालने में मदद की है। छोटी से लेकरबड़ी बीमारियों तक को काटा है, लेकिन आजकल लोग इन प्राकृतिक औषधियों को दरकिनार करके एलोपैथिक दवाओं परअधिक विश्वास करने लगे हैं। कारण उनका तेजी से असर करना, लेकिन यह उनके शरीर के लिए कितना नुकसानदेह साबितहोता है, इस जानकारी से वंचित हैं लोग।

बेहद फायदेमंद:

चलिए बाकी बातें छोड़िए… इस समय हमारा मुद्दा है इन प्राकृतिक जड़ी–बूटियों के प्रयोग से कैसे अपने दिमाग को बढ़ाया जाए।तो आपको बता दें कि यह बेहद आसान है, आपको केवल आगे बताई जा रही जड़ी–बूटियों को अपने रोज़ाना के आहार में शामिलकरना है।

उपयोग करें:

आप चाहे तो इन्हें कैसे भी इस्तेमाल कर सकते हैं… जैसे कि खाने के बीच में, सब्जियों में मिलाकर भी या फिर अलग से सेवनकरके। यदि आप पूर्ण निर्देशों के हिसाब से इनका प्रयोग करेंगे तो वाकई कुछ ही समय में अपने भीतर एक अलग ऊर्जा कोपाएंगे।

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जटामांसी:

दिमाग को तेज करने के लिए सबसे पहली उपयोगी बूटी है जटामांसी। औषधीय गुणों सेभरपूर यह बूटी व्यक्ति की याददाश्त को तेज करने का काम करती है। इस बूटी के नाममें ही इसके गुण छिपे हैं। जटा यानी कि बाल, और इस बूटी पर लगे हुए छोटे–छोटे बालजैसे तंतु काफी प्रभावशाली हैं।

अनेक गुण:

इनका सेवन करने पर यह धीरे–धीरे काम करते हैं, लेकिन काफी प्रभावशाली हैं। इस बूटी को पीसकर केवल एक चम्मच लेना हैऔर फिर एक कप दूध में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।

बाह्मी:

जिन लोगों को जड़ी–बूटियों का ज्ञान है, उन्होंने इस बूटी के बारे में काफी सुन रखा होगा।बाह्मी नामक जड़ी–बूटी को दिमाग के लिए एक खास टॉनिक माना गया है। यह दिमागको शांति और स्पष्टता प्रदान करती है और याद्दाश्त को मजबूत करने में भी मदद करती है।

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बच्चों के लिए फायदेमंद:

दिमाग को तेज करने वाली अधिकतम दवाओं में इस बूटी का उपयोग जरूर किया जाता है। बच्चों के लिए यह काफी लाभकारीहै क्योंकि परीक्षा के समय में उनकी याददाश्त को तेज करने के साथ–साथ उनके दिमाग को शांत करना भी आवश्यक होता है।इसलिए आधे चम्मच बाह्मी के पाउडर और शहद को गर्म पानी में मिलाकर उपयोग करें, लाभकारी होगा।

शंख पुष्पी:

शंख पुष्पी् भी काफी कॉमन बूटी है, जिसे दिमाग को बढ़ाने के साथ–साथ दिमाग में रक्तका सही सर्कुलेशन करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही यह बूटीव्यक्ति की रचनात्मकता को भी बढ़ावा देती है। यह जड़ी–बूटी हमारी याद करने कीक्षमता और सीखने की क्षमता को भी बढ़ाती है। दिमाग को तेज करने के लिए आधेचम्मच शंख पुष्पी को एक कप गरम पानी में मिला कर लें।

दालचीनी:

इस खास बूटी का प्रयोग तो भारतीय परिवारों में हर दूसरे घर में होता ही है। इसे मसालेके रूप में सबसे अधिक इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस बूटी के खास गुण से आप आजतक वंचित ही हैं।

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रोज़ाना इस्तेमाल करें:

क्योंकि दालचीनी सिर्फ गर्म मसाला ही नहीं, बल्कि दिमाग को तेज करने के खास जड़ी–बूटियों में से भी है। इसलिए खाने मेंमिलाने के अलावा आप दालचीनी को तेज दिमाग पाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। रात को सोते समय नियमित रूप सेएक चुटकी दालचीनी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और दिमाग तेज होता है।

हल्दी:

अब यह एक ऐसी औषधि है, जो हर घर में मौजूद है। इसे पाने के लिए तो आपको किसीप्रकार की मशक्कत करने की आवश्यकता भी नहीं है। यह आपकी किचन में ही मिलजाएगी, लेकिन इसका उपयोग केवल खाना बनाते समय ही ना करें।

मात्रा ठीक रखें:

दिमाग को तेज करने के लिए भी करें। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला रासायनिकतत्व कुरकुमीन दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद करता है और इसके नियमित सेवन से एल्जाइमररोग नहीं होता है। इसलिए आप इसे गर्म दूध में मिलाकर पी लें, फायदा होगा लेकिन ध्यान रहे कि ऐसा रोज़ाना ना करें। क्योंकिहल्दी की तासीर गर्म होती है, जिससे पेट की परेशानियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।

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जायफल:

वैसे इंडियन परिवारों में महिलाएं खाना बनाते समय जायफल का भी काफी प्रयोगकरती हैं। लेकिन इसका उपयोग दिमाग तेज करने के लिए भी होता है, यह भी जान लें।

तासीर है गर्म:

लेकिन हल्दी की तरह ही जायफल की भी तासीर गर्म होती है, इसलिए सही और कम मात्रा में ही इसका सेवन करना शरीर एवंदिमाग के लिए सही है। परन्तु कम मात्रा में भी यह दिमाग को तेज करने में सहायक सिद्ध होता है। इसको खाने से आपको कभीएल्जायइमर यानी भूलने की बीमारी नहीं होती।

अजवायन:

खाना हज़म हो जाए इसके लिए महिलाएं खाने में अजवायन का काफी प्रयोग करती हैं।पेट की परेशानी में भी यह काफी लाभकारी है, लेकिन इसके अलावा अजवायन दिमागतेज करने के काम आती है, क्या आप यह नहीं जानते?

अजवायन की पत्तियां:

परन्तु साबुत अजवायन नहीं, बल्कि अजवायन की पत्तियां आपको इस्तेमाल करनी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन पत्तियों मेंभरपूर मात्रा में मौजूद एंटी–ऑक्सी डेंट दिमाग के लिए एक औषधि की तरह काम करता है।

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तुलसी:

इससे पहले भी हमने तुलसी के कई फायदों से आपको परिचित कराया है, आज एक औरफायदा भी जान लें। तुलसी वैसे तो कई प्रकार की बीमारियों का इलाज करने में सहायकसिद्ध होती है, लेकिन साथ ही यह दिमाग को तेज करने के लिए एक जानी–मानी जड़ीबूटी भी है।

इसमें हैं एंटीऑक्सी डेंट्स:

इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सी डेंट हृदय और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में सुधार करता है। साथ ही इसमें पाई जाने वालीएंटी–इंफ्लेमेटरी अल्जाहइमर जैसे रोग से सुरक्षा प्रदान करता हैं।

केसर:

हम जानते हैं कि इस समय बाजार में केसर का क्या भाव चल रहा है। चुटकी भर केसरपाने के लिए भी अच्छी मात्रा में खर्चा करना पड़ता है, और वह केसर असली ही हो यहजानना भी एक कठिन कार्य ही है। लेकिन परेशान ना हों, क्योंकि ज़रा–सी केसर भीआपकी मदद कर देगी।

दूध में:

दूध में या फिर अन्य खाद्य पदार्थ में चुटकी से भी कम केसर का इस्तेमाल करने से अनिद्रा और डिप्रेशन जैसी बीमारियों सेछुटकारा मिलता है। और ऐसी ही बीमारियां हमारे दिमाग को कमज़ोर बनाती हैं.

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काली मिर्च:

यह थोड़ा कठिन है, लेकिन आपको काली मिर्च अधिक से अधिक इस्तेमाल करनीचाहिए। खाने में या फिर साबुत भी… क्योंकि इसमें पाया जाने वाला पेपरिन नामकरसायन शरीर और दिमाग की कोशिकाओं को आराम देता है। डिप्रेशन को दूर करने केलिए भी यह रसायन जादू सा काम करता है। इसीलिए दिमाग को स्वस्थ बनाए रखने केलिए काली मिर्च का उपयोग करें।

ब्रॉकोली:

हरी गोभी जैसी दिखने वाली यह सब्जी मस्तिष्क में नई कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावादेती है. इसके अलावा दिमाग की कोशिकाओं के बीच संपर्क को बेहतर करती है जिससेदिमाग तेज काम करता है और याददाश्त सुधरती है

अखरोट:

सभी मेवों में अखरोट ही ऐसा नट है जिसमें दिमागी शक्ति बढ़ाने वाले ओमेगा-3 फैटीएसिड सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. ओमेगा-3 के कारण मस्तिष्क मेंन्यूरोट्रांसमिशन यानि कोशिकाओं के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान बेहतर होता हैयानि दिमाग तेज काम करता है

टमाटर:

हर जगह आसानी से मिलने वाले टमाटर में कई गुण हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स औरलाइकोपीन का बढ़िया स्रोत होने के कारण यह मस्तिष्क की शक्ति बढ़ाने में अहमभूमिका निभाता है. फ्री रेडिकल दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं जिनसे भूलने की बीमारीया डिमेंशिया हो सकता है. रोज टमाटर खाने से पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट्स मिलेंगे, जो फ्रीरेडिकल्स को दूर रखें.

ग्रीन टी:

स्विट्जरलैंड की बाजेल यूनिवर्सिटी में हुए रिसर्च में पाया गया कि ग्रीन टी से दिमाग कोकई फायदे पहुंचते हैं. इससे मस्तिष्क की गतिविधियों को बेहतर बनाने, डिमेंशिया औरपार्किंसन्स को दूर रखने और याददाश्त को दुरुस्त रखने में भी मदद मिलती है.

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डार्क चॉकलेट:

इनमें शरीर और मस्तिष्क के लिए जरूरी बेहद अच्छी क्वालिटी के एंटीऑक्सीडेंट्स पाएजाते हैं. डार्क चॉकलेट में पाए जाने वाले फ्लैविनॉयड्स मस्तिष्क में रक्त संचार कोसुधारते हैं. वेस्ट वर्जिनिया की वीलिंग जेसूइट यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में इसे ध्यानलगाने में भी मददगार पाया गया.

ब्लूबेरी:

इन फलों में भी फ्लैविनॉयड पाए जाते हैं जो दिमाग को तेज बनाते हैं. इससे याददाश्तऔर चीजों को पहचानने की शक्ति बढ़ती है और दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले फ्रीरेडिकल घटते हैं. फ्री रेडिकल दिमाग के ऊतकों को नष्ट करते हैं और याददाश्त खोने केलिए जिम्मेदार होते हैं.

पालक:

पालक में पोटैशियम कूट कूट के भरा होता है. इससे दिमागी कोशिकाओं में आपसीसंपर्क बेहतर होता है, साथ ही सोचने–समझने और याद रखने की शक्ति भी बढती है. पालक में एंटीऑक्सीडेंट्स के अलावा मैग्नीशियम, फोलेट, विटामिन ई और के भी होतेहैं जो डिमेंशिया से बचाते हैं.

भद्रासन विधि

आसन बिछाकर बैठ जाएं। दाहिना पैर घुटने से मोड़कर एड़ी उपस्थ और गुदा के मध्य केदाहिने भाग में और बायां पैर मोड़कर एड़ी सीवन के बायें भाग में इस प्रकार रखें कि दोनोंपैर के तलवे एक दूसरे को लगकर रहें। इस स्थिति को रेचक कहते हैं। रेचक करके दोनोंहाथ सामने जमीन पर रखें। धीरे–धीरे शरीर को ऊपर उठाएं और दोनों पैर के पंजों परइस प्रकार बैठें कि शरीर का वजन एड़ी के मध्य भाग पर आए। ध्यान रहे अंगुलियों वाला भाग छूटा रहे।

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लाभ

इस आसन से शरीर फूर्तिला और फिट रहता है। बुद्धि तीक्ष्ण होती है। कल्पनाशक्ति का भी विकास होता है। चंचलता कम होतीहै। पाचन शक्ति बढ़ती है। शरीर शुद्धि होने लगती है। स्नायु मजबूत होता है। धातुक्षय, गैस, स्वप्नदोष, कमर का दर्द, सिरदर्द, अनिद्रा, दमा, मूर्छारोग, बवासीर, उल्टी, हिचकी, अतिसार,उदररोग, नेत्रविकार आदि असंख्य रोगों में इस आसन से लाभ होताहै।

प्रतिदिन प्रात:काल एक चम्मच आंवले का रस शहद के साथ चाटना चाहिए|

आंवला, गिलोय और जटामासी – सबको बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें| फिर 2 ग्राम चूर्ण सुबह के समय ताजे पानी सेसेवन करें|

आप यह बात ठीक से याद रखें कि हमारी यादशक्ति हमारे ध्यान पर और मन की एकाग्रता पर निर्भर करती है। हम जिस तरफजितना ज्यादा एकाग्रतापूर्वक ध्यान देंगे, उस तरफ हमारी विचारशक्ति उतनी ज्यादा केन्द्रित हो जायेगी। जिस कार्य में भीजितनी अधिक तीव्रता, स्थिरता और शक्ति लगायी जायेगी, उतनी गहराई और मजबूती से वह कार्य हमारे स्मृति पटल परअंकित हो जायेगा।

स्मृति को बनाये रखना ही स्मरणशक्ति है और इसके लिए जरूरी है सुने हुए व पढ़े हुए विषयों का बार–बार मानना करना, अभ्यास करना। जो बातें हमारे ध्यान में बराबर आती रहती हैं, उनकी याद बनी रहती है और जो बातें लम्बे समय तक हमारेध्यान में नहीं आतीं,उन्हें हम भूल जाते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने अभ्यासक्रम (कोर्स) की किताबों को पूरे मनोयोगसे एकाग्रचित्त होकर पढ़ा करें और बारंबार नियमित रूप से दोहराते भी रहें। फालतू सोच विचार करने से, चिंता करने से, ज्यादाबोलने से, फालतू बातें करने से, झूठ बोलने से या बहाने बाजी करने से तथा कार्य के कार्यों में उलझे रहने से स्मरणशक्ति नष्टहोती है।

बुद्धि कहीं बाजार में मिलने वाली चीज नही है, बल्कि अभ्यास से प्राप्त करने की और बढ़ायी जाने वाली चीज है। इसलिए आपकोभरपूर अभ्यास करके बुद्धि और ज्ञान बढ़ाने में जुटे रहना होगा।

विद्या, बुद्धि और ज्ञान को जितना खर्च किया जाय उतना ही ये बढ़ते जाते हैं जबकि धन या अन्य पदार्थ खर्च करने पर घटते हैं।विद्या की प्राप्ति और बुद्धि के विकास के लिए आप जितना  प्रयत्न करेंगे, अभ्यास करेंगे, उतना ही आपका ज्ञान और बौद्धिकबल बढ़ता जायगा।

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सतत अभ्यास और परिश्रम करने के लिए यह भी जरूरी है कि आपका दिमाग और शरीर स्वस्थ व ताकतवर बना रहे। यदिअल्प श्रम में ही आप थक जायेंगे तो पढ़ाई–लिखाई में ज्यादा समय तक मन नहीं लगेगा। इसलिए निम्न प्रयोग करें।

यह खाये बुद्धि बढ़ाये:
आवश्यक सामग्रीः

शंखावली (शंखपुष्पी) का पंचांग कूट–पीसकर,छानकर, महीन, चूर्ण करके शीशी में भर लें। बादाम की 2 गिरी और तरबूज, खरबूजा, पतली ककड़ी और मोटी खीरा ककड़ी इन चारों के बीज 5-5 ग्राम, 2 पिस्ता, 1 छुहारा,4 इलायची (छोटी), 5 ग्राम सौंफ, 1 चम्मच मक्खन और एक गिलास दूध लें।

विधिः

रात में बादाम, पिस्ता, छुहारा और चारों मगज 1 कप पानी में डालकर रख दें। प्रातःकाल बादाम का छिलका हटाकर उन्हें दो बारबूँद पानी के साथ पत्थर पर घिस लें और उस लेप को कटोरी में ले लें। फिर पिस्ता, इलायची के दाने व छुहारे को बारीक काट–पीसकर उसमें मिला लें। चारों मगज भी उसमें ऐसे ही डाल लें। अब इन सबको अच्छी तरह मिलाकर खूब चबा–चबाकर खाजायें। उसके बाद 3 ग्राम शंखावली का महीन चूर्ण मक्खन में मिलाकर चाट लें और एक गिलास गुनगुना मीठा दूध 1-1 घूँट करकेपी लें। अंत में, थोड़े सौंफ मुँह में डालकर धीरे–धीरे 15-20 मिनट तक चबाते रहें और उनका रस चूसते रहें। चूसने के बाद उन्हेंनिगल जायें।

लाभः

यह प्रयोग दिमागी ताकत, तरावट और स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए बेजोड़ है। साथ ही साथ यह शरीर में शक्ति व स्फूर्ति पैदाकरता है। लगातार 40 दिन तक प्रतिदिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर खाली पेट इसका सेवन करके आप चमत्कारिकलाभ देख सकते हैं।

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यह प्रयोग करने के दो घंटे बाद भोजन करें। उपरोक्त सभी द्रव्य पंसारी या कच्ची दवा बेचने वाले की दुकान से इकट्ठे ले आयेंऔर 15-20 मिनट का समय देकर प्रतिदिन तैयार करें। इस प्रयोग को आप 40 दिन से भी ज्यादा, जब तक चाहें कर सकते हैं।

एक अन्य प्रयोगः एक गाजर और लगभग 50-60 ग्राम पत्ता गोभी अर्थात् 10-12 पत्ते काटकर प्लेट में रख लें। इस पर हराधनिया काटकर डाल दें। फिर उसमें सेंधा नमक, काली मिर्च का चूर्ण और नींबू का रस मिलाकर खूब चबा चबाकर नाश्ते के रूपमें खाया करें।

भोजन के साथ एक गिलास छाछ भी पिया करें।

सावधानियाँ:

रात को 9 बजे के बाद पढ़ने के लिए जागरण करें तो आधे–आधे घंटे के अंतर पर आधा गिलास ठंडा पानी पीते रहें। इससेजागरण के कारण होने वाला वातप्रकोप नहीं होगा। वैसे 11 बजे से पहले सो जाना ही उचित है।

लेटकर या झुके हुए बैठकर न पढ़ा करें। रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर बैठें। इससे आलस्य या निद्रा का असन नहीं होगा और स्फूर्तिबनी रहेगी। सुस्ती महसूस हो तो थोड़ी चहलकदमी करें। नींद भगाने के लिए चाय या सिगरेट का सेवन कदापि न करें।

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