Category - मीराबाई भजन

मीराबाई भजन

म्हारे घर होता जाज्यो

म्हारे घर होता जाज्यो/म्हारे-घर-होता-जाज्यो म्हारे घर होता जाज्यो राज। अबके जिन टाला दे जा सिर पर राखूं बिराज॥ म्हे तो जनम जनमकी दासी थे म्हांका सिरताज। पावणड़ा म्हांके भलां ही पधार। ह्‌या सब ही सुघारण काज॥ म्हे तो बुरी छां थांके...

मीराबाई भजन

प्रभुजी मैं राज़ कर

प्रभुजी मैं राज़ कर/प्रभुजी-मैं-राज़-कर प्रभुजी मैं अरज करुं छूं म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार॥ इण भव में मैं दुख बहु पायो संसा-सोग निवार। अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार॥ यों संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार। मीरा के प्रभु...