Category - राजस्थानी भजन

राजस्थानी भजन

गजेन्द्र मोक्ष

हे गोविन्द हे गोपाल , अब तो जीवर हारे हे गोविन्द राखो शरण , अब तो जीवन हारे “टेर ” नीर पीवन हेतु गयो सिन्धु के किनारे सिन्धु बीच वसत ग्राह , चरण गई पछारे ||1|| है गोविन्द चार पहर युद्ध भयो लई गयो मझधारे नाक कान डूबन लागे , कृष्ण...